त्रिशूर, केरल — केरल के त्रिशूर जिले में मंगलवार दोपहर एक पटाखा बनाने की फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट हो गया। इस हादसे में कम से कम 13 श्रमिकों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है।
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क्या हुआ है
यह विस्फोट दोपहर करीब 3:30 बजे मुंडाथिकोड इलाके में धान के खेतों के पास बनी अस्थायी पटाखा फैक्ट्रियों में हुआ। यहां करीब 40 मजदूर आगामी त्रिशूर पूरम उत्सव के लिए पटाखे बना रहे थे। पहले विस्फोट के बाद लगातार कई और धमाके हुए। इन धमाकों की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और आसपास के गांवों में लोगों को लगा जैसे भूकंप आ गया हो। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए और आसमान में काला धुआं छा गया।
घटनास्थल कहां है
यह दुर्घटना त्रिशूर जिले के एक ग्रामीण इलाके में हुई। यह क्षेत्र अपने मंदिर उत्सवों के लिए जाना जाता है। यह फैक्ट्री त्रिशूर पूरम में भाग लेने वाले प्रमुख दलों में से एक, तिरुवाम्बाडी मंदिर के लिए पटाखे बना रही थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री के पास 2,000 किलोग्राम तक विस्फोटक सामग्री रखने की अनुमति थी। हालांकि, घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकरा होने के कारण एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में काफी देरी हुई।
अधिकारियों ने क्या कहा
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि 13 घायलों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से पांच की हालत 60 से 70 प्रतिशत जलने के कारण बेहद गंभीर बनी हुई है। पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने घटनास्थल से अब तक सात शव और नौ शरीर के अंग बरामद किए हैं, जो धमाके की भयावहता को दर्शाता है।
नगर निगम अध्यक्ष पी.एन. सुरेंद्रन ने पत्रकारों से कहा, "आशंका है कि भीषण गर्मी के कारण यह हादसा हुआ है।" हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही सही कारणों का पता चल पाएगा।
केरल के पुलिस प्रमुख रवाड़ा चंद्रशेखर घटनास्थल का दौरा करने के बाद वरिष्ठ पुलिस, राजस्व विभाग, अग्निशमन और विस्फोटक विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस बैठक में यह जांच की जाएगी कि कहीं निगरानी में कोई चूक तो नहीं हुई थी।
वर्तमान स्थिति
पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। अभी तक केवल चार शवों की ही शिनाख्त हो पाई है। विस्फोट इतना भीषण था कि कई शव पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए हैं, जिससे पहचान में कठिनाई आ रही है। बचाव कार्य समाप्त हो चुका है, लेकिन इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और फोरेंसिक टीमें सबूत जुटा रही हैं।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
लोगों पर क्या असर पड़ा
यह त्रासदी इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि यह महज तीन दिनों के भीतर भारत में पटाखों से जुड़ी दूसरी बड़ी दुर्घटना है। इससे पहले रविवार को पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के एक पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट में कम से कम 25 लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हादसों ने भारत के पटाखा उद्योग, विशेषकर तमिलनाडु के शिवकाशी क्षेत्र में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक और घायल श्रमिक केरल के सबसे प्रसिद्ध त्योहार त्रिशूर पूरम की तैयारी कर रहे थे। यह त्योहार अपनी भव्य आतिशबाजी के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस हादसे ने आगामी उत्सव की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है।
आगे क्या होगा
सरकार ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम इस बात का पता लगाएगी कि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और क्या फैक्ट्री को दी गई अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ था। अधिकारी इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या दोपहर के उच्च तापमान के कारण रासायनिक प्रतिक्रिया हुई, जिससे यह विस्फोट हुआ।
त्रिशूर पूरम समिति के सामने अब त्योहार के दौरान होने वाली आतिशबाजी को लेकर कठिन फैसला है। चूंकि हादसे का शिकार हुए मजदूर तिरुवाम्बाडी मंदिर समूह के लिए काम कर रहे थे, इसलिए प्रसिद्ध रात्रिकालीन आतिशबाजी का कार्यक्रम अधर में लटक गया है।
निष्कर्ष
यह दर्दनाक घटना भारत के असंगठित पटाखा निर्माण क्षेत्र में बने रहने वाले खतरों को उजागर करती है। बार-बार होने वाली त्रासदियों के बावजूद, सुरक्षा नियमों का पालन अक्सर लापरवाही भरा होता है, खासकर त्योहारों के मौसम में लगाई जाने वाली अस्थायी इकाइयों में। जहां एक ओर परिवार अपनों की मौत का गम मना रहे हैं और झुलसे हुए लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, वहीं यह घटना एक कड़वी याद दिलाती है कि भारत के त्योहारों को रोशन करने वाली चमक-धमक के पीछे कितनी बड़ी मानवीय कीमत चुकानी पड़ती है। देशभर में गर्मी अपने चरम पर है, ऐसे में अगली दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
